जनगणना ड्यूटी पर शिक्षकों का हल्लाबोल, बीएसए कार्यालय में गूंजा विरोध; बोले—मनमानी बर्दाश्त नहीं!
बरेली: बरेली। जनगणना ड्यूटी के आवंटन और प्रशिक्षण में कथित मनमानी को लेकर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने मोर्चा खोल दिया। बुधवार को बीएसए कार्यालय पर सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाओं ने जोरदार प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई। संघ ने दूरस्थ स्थानों पर ड्यूटी लगाए जाने और प्रशिक्षण से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं को उठाते हुए व्यवस्था में संशोधन की मांग की।
प्रांतीय उपाध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष नरेश गंगवार के नेतृत्व में शिक्षक-शिक्षिकाओं ने बीएसए डॉ. विनीता को ज्ञापन सौंपा। संघ का कहना है कि जनगणना के द्वितीय चरण में ड्यूटी आवंटित करते समय दिव्यांग कर्मचारियों, गर्भवती शिक्षिकाओं और प्रभारी प्रधानाध्यापकों की परिस्थितियों का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। दूरस्थ स्थानों पर ड्यूटी और प्रशिक्षण से संबंधित परेशानियों के कारण शिक्षकों को व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
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प्रदर्शन के दौरान नरेश गंगवार ने स्पष्ट किया कि शिक्षक संगठन जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य का विरोध नहीं कर रहा है। संगठन की मांग है कि ड्यूटी आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी हो और कर्मचारियों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जाएं।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों के सम्मान, अधिकारों और व्यावहारिक समस्याओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। दिव्यांग और गर्भवती शिक्षिकाओं सहित विशेष परिस्थितियों वाले कर्मचारियों के मामलों में संवेदनशीलता बरतना जरूरी है।
बीएसए ने दिया संशोधन का आश्वासन
शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को अधिकारियों के सामने रखा। बीएसए डॉ. विनीता ने प्राप्त प्रार्थना पत्रों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और नगर निगम के माध्यम से ड्यूटी में आवश्यक संशोधन कराने का आश्वासन दिया।
इसके बाद शिक्षक संघ ने जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को भी ज्ञापन सौंपकर मामले का शीघ्र समाधान कराने की मांग की।
अब फैसले का इंतजार
शिक्षक संघ ने उम्मीद जताई कि अधिकारियों के आश्वासन के बाद प्रभावित शिक्षक-शिक्षिकाओं की समस्याओं का जल्द समाधान होगा। अब निगाहें इस बात पर हैं कि ड्यूटी आवंटन में संशोधन को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है।
शिक्षक संघ का संदेश साफ है—राष्ट्रीय जिम्मेदारी निभाने को तैयार हैं शिक्षक, लेकिन ड्यूटी आवंटन में पारदर्शिता और मानवीय संवेदनशीलता भी जरूरी है।



