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सपा में रहे ‘शेर’, भाजपा में आकर क्यों हुए ढेर? ध्रुव चतुर्वेदी की 2027 में वापसी होगी?

जोशी टाइम्स डेस्क बरेली • 21 अक्टूबर 2026, 12:13 PM
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सपा में रहे ‘शेर’, भाजपा में आकर क्यों हुए ढेर? ध्रुव चतुर्वेदी की 2027 में वापसी होगी?

बरेली। राजनीति भी गजब का खेल है! कभी संगठन में सक्रियता, कभी पदों की जिम्मेदारी और कभी नई पार्टी में अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद। ध्रुव चतुर्वेदी का राजनीतिक सफर भी बरेली की सियासत में ऐसे ही सवाल खड़े कर रहा है। कांग्रेस से शुरुआत, समाजवादी पार्टी में संगठनात्मक जिम्मेदारियां और फिर भारतीय जनता पार्टी में प्रवेश—लेकिन आज उनकी राजनीतिक सक्रियता को लेकर चर्चा कुछ अलग ही है।

कांग्रेस से सपा और फिर भाजपा तक का सफर

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ध्रुव चतुर्वेदी के बताए गए राजनीतिक सफर के मुताबिक, वह कांग्रेस में महानगर महामंत्री रहे। इसके बाद वर्ष 2009 से 2016 तक समाजवादी पार्टी में महानगर कोषाध्यक्ष और सचिव की जिम्मेदारी निभाई। वर्ष 2016 में मेयर चुनाव के दौरान उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। सपा में संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाने के बाद भाजपा में उनकी नई राजनीतिक पारी शुरू हुई, लेकिन क्या यह पारी उनकी उम्मीदों के मुताबिक आगे बढ़ सकी?

डॉ. अनिल शर्मा की ‘किचन कैबिनेट’ में नाम, फिर भी सियासत ठंडी!

बरेली की राजनीतिक चर्चाओं में ध्रुव चतुर्वेदी को भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. अनिल शर्मा की ‘किचन कैबिनेट’ का सदस्य भी कहा जाता है। मगर राजनीतिक हलकों में पहचान होना और सक्रिय राजनीति में लगातार आगे बढ़ना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।

आज की चर्चा का सबसे बड़ा सवाल यही है कि ध्रुव चतुर्वेदी की राजनीति आखिर किस मोड़ पर खड़ी है? एक समय समाजवादी पार्टी में संगठनात्मक रूप से सक्रिय रहने वाले ध्रुव की राजनीति भाजपा में आने के बाद फिलहाल काफी ठंडी नजर आती है। हालांकि, यह राजनीतिक आकलन है; उनकी वर्तमान गतिविधियों और संगठनात्मक भूमिका की पूरी तस्वीर सामने आना भी जरूरी है।

संयुक्त व्यापार मंडल में जिम्मेदारी, लेकिन राजनीतिक भविष्य पर सवाल

वर्तमान में ध्रुव चतुर्वेदी संयुक्त व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष हैं। यानी सामाजिक और व्यापारिक क्षेत्र में उनकी भूमिका बनी हुई है। लेकिन राजनीतिक पहचान को लेकर सवाल अपनी जगह कायम हैं। क्या भाजपा में उन्हें आगे कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी या वह अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए कोई नया रास्ता तलाशेंगे?

क्या फिर समाजवादी पार्टी में हो सकती है वापसी?

अब कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है। अगर ध्रुव चतुर्वेदी को भाजपा में लंबे समय तक राजनीतिक अवसर और सक्रिय भूमिका नहीं मिलती है, तो क्या वह भविष्य में अपने पुराने राजनीतिक घर समाजवादी पार्टी की ओर फिर रुख कर सकते हैं?

फिलहाल उनकी सपा में वापसी को लेकर कोई आधिकारिक संकेत या घोषणा सामने नहीं है। इसलिए इसे एक संभावित सियासी सवाल के रूप में ही देखा जाना चाहिए। लेकिन राजनीति में पुराने रिश्ते, संगठनात्मक अनुभव और बदलते समीकरण कभी-कभी नए रास्ते खोल देते हैं।

2027 से पहले ध्रुव कौन-सा दांव चलेंगे?

अब निगाहें 2027 के राजनीतिक माहौल पर हैं। क्या ध्रुव चतुर्वेदी भाजपा में अपनी सियासी पारी को नई रफ्तार देंगे, संगठन में अपनी जगह मजबूत करेंगे या भविष्य में किसी दूसरे राजनीतिक विकल्प पर विचार करेंगे?

कुल मिलाकर, समाजवादी पार्टी में संगठनात्मक सक्रियता से पहचान बनाने वाले ध्रुव चतुर्वेदी की राजनीति भाजपा में फिलहाल ठंडी पड़ती दिखाई देती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि वह इसी पार्टी में नई पारी की शुरुआत करते हैं या भविष्य में साइकिल की सवारी की संभावनाएं फिर चर्चा में आती हैं।

बरेली की सियासत में सवाल बरकरार है—ध्रुव चतुर्वेदी भाजपा में ही अपनी राजनीतिक जमीन तलाशेंगे या 2027 से पहले कोई नया सियासी मोड़ देखने को मिलेगा?

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