बरेली में गूंजा पहाड़ों का दर्द! फिल्म ‘पायर (चिता)’ को लेकर उत्तराखंडी समाज से खास मुलाकात
बरेली: 30 अक्टूबर को देशभर में रिलीज होगी फिल्म, बुजुर्गों के अकेलेपन और पहाड़ों से पलायन की मार्मिक कहानी दिखाएगी ‘पायर’
बरेली। उत्तराखंड की मिट्टी, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी भावनात्मक हिंदी फिल्म ‘पायर (चिता)’ को लेकर बरेली में उत्तराखंडी समाज के बीच विशेष चर्चा हुई। उत्तरायणी जन कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री अमित कुमार पंत के सान्निध्य में आयोजित इस मुलाकात में समाज के सम्मानित लोगों और पत्रकारों के साथ फिल्म के विषय, संदेश और सामाजिक महत्व पर विस्तार से बातचीत की गई।
यहाँ आपका विज्ञापनअपने व्यापार को हज़ारों पाठकों तक पहुँचाएँ 9759000030आगामी 30 अक्टूबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही फिल्म ‘पायर’ को लेकर उपस्थित लोगों से इसे देखने की अपील की गई। फिल्म के माध्यम से पहाड़ों में रह रहे बुजुर्गों के अकेलेपन, उनके संघर्ष और अपनों से दूर होती जिंदगी जैसे संवेदनशील विषयों को सामने लाने का प्रयास किया गया है।
सिर्फ फिल्म नहीं, पहाड़ों की जिंदगी का आईना है ‘पायर’
फिल्म ‘पायर (चिता)’ को महज मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि पहाड़ों की सामाजिक परिस्थितियों और बदलते पारिवारिक रिश्तों को समझने का एक माध्यम बताया गया। रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में गांवों से दूर जाते लोगों के बीच पीछे छूटते बुजुर्गों का जीवन आज एक गंभीर सामाजिक सवाल बन चुका है।
फिल्म का संदेश है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ में कहीं हम अपनी जड़ों, अपने गांवों और उन बुजुर्गों को तो नहीं भूल रहे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन परिवार के लिए समर्पित कर दिया। युवा पीढ़ी से विशेष आग्रह किया गया कि वह अपने माता-पिता और परिवार के बुजुर्गों के साथ यह फिल्म देखे और उनके मन की भावनाओं को समझने का प्रयास करे।
उत्तराखंडी समाज और पत्रकारों का जताया आभार
इस विशेष मुलाकात के अवसर पर उत्तरायणी जन कल्याण समिति के अध्यक्ष श्री अमित कुमार पंत, श्री रामेश्वर पांडेय, श्री बृजेश मिश्रा, श्री नवीन पाठक, श्री विनोद जोशी, श्री शेखर यादव, श्री देव भट्ट, श्री रवि भट्ट, श्री नवीन चंद्र भट्ट सहित बरेली के उत्तराखंडी समाज के सदस्यों और पत्रकार बंधुओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
‘उत्तराखंड की खोज’ के संस्थापक श्री जगजीवन कन्याल ने सभी उपस्थित लोगों का धन्यवाद करते हुए फिल्म के सामाजिक संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की अपील की।
अपनी मिट्टी और बुजुर्गों से जुड़ने का संदेश
फिल्म ‘पायर’ के माध्यम से समाज को यह संदेश देने का प्रयास किया जा रहा है कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और पारिवारिक जिम्मेदारियों को जीवित रखना हम सभी का कर्तव्य है। बुजुर्गों को केवल सहारे की नहीं, बल्कि अपनेपन, सम्मान और साथ की भी जरूरत होती है।
फिल्म ‘पायर (चिता)’ 30 अक्टूबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। अब देखना होगा कि पहाड़ों के जीवन और बुजुर्गों की भावनाओं को केंद्र में रखने वाली यह फिल्म दर्शकों के दिलों पर कितना गहरा असर छोड़ती है।


